अध्याय 7: तिरंगा आन्दोलन, करनाल चुनाव एवं गो-रक्षा
१९३० के दशक में स्वामी जी ने अपने करनाल निवास पर ब्रिटिश दमन के विरुद्ध निडरता से तिरंगा एवं ओम् ध्वज फहराया। स्वाधीन भारत में उन्होंने लोकतांत्रिक सुचिता स्थापित करने में योगदान दिया। सन् १९६२ के ऐतिहासिक करनाल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के धनबल एवं जालंधर के धनी प्रत्याशी महाशय वीरेन्द्र जी के विरुद्ध स्वामी जी ने जनसंघ के प्रत्याशी स्वामी रामेश्वरानन्द जी का पूर्ण समर्थन किया। १०३ वर्ष की आयु में उन्होंने जगाधरी के निकट हुए हमले में लाठी से क्रांतिकारियों की रक्षा की और स्वामी रामेश्वरानन्द को १७,००० मतों से विजयी कराया। सन् १९६६ में स्वामी जी ने दिल्ली संसद भवन के समक्ष ऐतिहासिक सर्वदलीय गो-रक्षा आन्दोलन का सक्रिय नेतृत्व किया।