एक क्रांतिकारी सन्यासी और स्वतंत्रता सेनानी
स्वामी भीष्म जी महाराज (1859 – 1984) भारत के उन विरले संतों में से थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वेद प्रचार और राष्ट्र जागरण में समर्पित कर दिया।
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जीवन परिचय
स्वामी भीष्म जी महाराज (7 मार्च 1859 – 8 जनवरी 1984) का जीवन राष्ट्रभक्ति और आध्यात्म का एक अद्भुत संगम था। 125 वर्षों के उनके दीर्घायु जीवन में, उन्होंने समाज को नई दिशा दी।
क्रांतिकारियों के रक्षक
इतिहास गवाह है कि जब ब्रिटिश सरकार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ढूंढ रही थी, तब स्वामी जी ने उन्हें अपने आश्रम में शरण दी।
अमर वाक्य
"धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं है, राष्ट्र की रक्षा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।"
- स्वामी भीष्म जी महाराज
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