अध्याय 3: सैन्य विप्लव, आत्म-इन्द्रिय छेदन एवं दीक्षा
गृह त्याग के बाद लाल सिंह नाभा (Nabha) एवं इन्ग्रोरी (Engrori) में अज्ञातवास में रहे। सन् १८७९ में औपनिवेशिक उत्पीड़न के विरुद्ध सक्रिय क्रांतिकारियों के प्रभाव में आकर वे कानपुर गए और ब्रिटिश सेना की ६२वीं पलटन (62nd Platoon) में सिपाही भर्ती हो गए। सन् १८८१ में संतरी ड्यूटी के दौरान उन्होंने शस्त्रागार पर डाका डाला, ब्रिटिश राइफल एवं कारतूस लूटे और मेरठ फरार हो गए। वहाँ उन्होंने अपना नाम ‘लेफ्टिनेंट समर सिंह’ रखा। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने सतकुम्भा तालाब (Satkumbha Lake) पर आत्म-इन्द्रिय छेदन (Self-Castration) का कठोरतम कदम उठाया। इसके उपरांत, हरिद्वार में योगि-राज (Yogi-Raj) से सन्यास दीक्षा ग्रहण की और २२ वर्ष के अखंड मौन एवं ब्रह्मचर्य का व्रत लिया।