अध्याय 2: यज्ञोपवीत विवाद एवं गृह त्याग
सन् १८७४ में बड़ा गांव (Bada Gaon) में शिल्प कार्य एवं कुआं खुदाई के दौरान यज्ञोपवीत धारण करने को लेकर स्थानीय रूढ़िवादी तत्वों के साथ विवाद छिड़ गया। निम्न जाति समझे जाने के कारण लाल सिंह को जनेऊ धारण करने से रोका गया। इस स्वाभिमान एवं सामाजिक ऊंच-नीच के द्वंद्व ने १५ वर्षीय किशोर लाल सिंह के मन में समाज सुधार की तीव्र ज्वाला प्रज्वलित कर दी। सन् १८७७ में पूण्डेरकर में विवाह प्रस्ताव एवं जनेऊ विवाद अत्यधिक बढ़ने पर लाल सिंह ने रात के अंधकार में गृह त्याग कर दिया और हमेशा के लिए सन्यास पथ पर अग्रसर हो गए।