जीवन चरित (Biography Chapters)

तपस्वी स्वामी भीष्म जी महाराज के जीवन गाथा का विभिन्न अध्यायों में विस्तृत ऐतिहासिक वृत्तांत।

अध्याय 1

अध्याय 1: तेवड़ा में जन्म एवं ग्राम-जीवन

Page 44-45
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स्वामी भीष्म जी महाराज का जन्म ०७ मार्च १८५९ (विक्रमी संवत् १९१५) को तत्कालीन पंजाब के करनाल जिले के तेवड़ा (Tewra) गाँव में हुआ था। पूर्वजों का मुख्य केंद्र थ्योड़ा एवं तेवड़ा था। बचपन का नाम लाल सिंह था। उनके पिता श्री बाहराम (Bahram) तथा माता श्रीमती पार्वती (Parvati) थीं। दादा श्री नानक चन्द (Nanak … Read more

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अध्याय 2

अध्याय 2: यज्ञोपवीत विवाद एवं गृह त्याग

Page 46
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सन् १८७४ में बड़ा गांव (Bada Gaon) में शिल्प कार्य एवं कुआं खुदाई के दौरान यज्ञोपवीत धारण करने को लेकर स्थानीय रूढ़िवादी तत्वों के साथ विवाद छिड़ गया। निम्न जाति समझे जाने के कारण लाल सिंह को जनेऊ धारण करने से रोका गया। इस स्वाभिमान एवं सामाजिक ऊंच-नीच के द्वंद्व ने १५ वर्षीय किशोर लाल … Read more

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अध्याय 3

अध्याय 3: सैन्य विप्लव, आत्म-इन्द्रिय छेदन एवं दीक्षा

Page 47-48
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गृह त्याग के बाद लाल सिंह नाभा (Nabha) एवं इन्ग्रोरी (Engrori) में अज्ञातवास में रहे। सन् १८७९ में औपनिवेशिक उत्पीड़न के विरुद्ध सक्रिय क्रांतिकारियों के प्रभाव में आकर वे कानपुर गए और ब्रिटिश सेना की ६२वीं पलटन (62nd Platoon) में सिपाही भर्ती हो गए। सन् १८८१ में संतरी ड्यूटी के दौरान उन्होंने शस्त्रागार पर डाका … Read more

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अध्याय 4

अध्याय 4: शास्त्र दीक्षा, आर्य समाज और लोक-भजन

Page 48-50
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२२ वर्षों के मौन साधना के उपरांत स्वामी भीष्म जी ने शास्त्र अध्ययन प्रारंभ किया। अजमेर एवं हरिद्वार प्रवास के दौरान वे महर्षि दयानन्द सरस्वती के ‘सत्यार्थ प्रकाश’ से अत्यधिक प्रभावित हुए। सन् १९०३ में ग्राम बाली (Bali) में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से उन्होंने विधिवत रूप से वैदिक सिद्धांतों को अपनाया। समाज के अंधविश्वास, … Read more

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अध्याय 5

अध्याय 5: अछूतोद्धार, सुधार यात्राएं एवं नारी रक्षा

Page 50-54
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स्वामी भीष्म जी का मानना था कि जो समाज महिलाओं और वंचितों की रक्षा नहीं कर सकता, वह स्वतंत्र होने के योग्य नहीं है। सन् १९०९ में सहारनपुर रेलवे स्टेशन के निकट उन्होंने अपहरण की जा रही सिक्ख महिलाओं को तस्करों से छुड़ाया। उसी वर्ष, पुरानी दिल्ली के संकरे दरीबा कलां (Dariba Kalan) क्षेत्र में … Read more

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अध्याय 6

अध्याय 6: करेहुड़ा आश्रम: क्रान्तिकारियों का शरणस्थल और बम विप्लव

Page 55-59
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पारंपरिक

⚠️ ऐतिहासिक विसंगति चेतावनी (Historical Conflict Warning) ऐतिहासिक संदर्भ: अभिनन्दन ग्रन्थ (१९८१) के पृष्ठ ५९ पर उल्लेख है कि क्रान्तिकारी अशफाकुल्ला खाँ का निधन करेहुड़ा आश्रम में एक असमय बम विस्फोट में हुआ था। तथापि, आधिकारिक एवं स्थापित भारतीय इतिहास के दस्तावेजों के अनुसार, अशफाकुल्ला खाँ को काकोरी कांड में उनकी भूमिका के लिए १९ … Read more

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अध्याय 7

अध्याय 7: तिरंगा आन्दोलन, करनाल चुनाव एवं गो-रक्षा

Page 59-61, 81-83, 100-102
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१९३० के दशक में स्वामी जी ने अपने करनाल निवास पर ब्रिटिश दमन के विरुद्ध निडरता से तिरंगा एवं ओम् ध्वज फहराया। स्वाधीन भारत में उन्होंने लोकतांत्रिक सुचिता स्थापित करने में योगदान दिया। सन् १९६२ के ऐतिहासिक करनाल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के धनबल एवं जालंधर के धनी प्रत्याशी महाशय वीरेन्द्र जी के विरुद्ध स्वामी … Read more

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अध्याय 8

अध्याय 8: 121वीं वर्षगाँठ एवं महासमाधि

Page 2, 4, 103-105, 112-114
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२३ और २४ मई १९८१ को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (Kurukshetra) के प्रांगण में स्वामी जी की १२१वीं वर्षगाँठ पर भव्य अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में उपराष्ट्रपति न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह, गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह, कृषि मंत्री राव बीरेन्द्र सिंह और मुख्यमंत्री भजन लाल सहित देश के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया और स्वामी … Read more

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