अध्याय 6: करेहुड़ा आश्रम: क्रान्तिकारियों का शरणस्थल और बम विप्लव
⚠️ ऐतिहासिक विसंगति चेतावनी (Historical Conflict Warning)
ऐतिहासिक संदर्भ: अभिनन्दन ग्रन्थ (१९८१) के पृष्ठ ५९ पर उल्लेख है कि क्रान्तिकारी अशफाकुल्ला खाँ का निधन करेहुड़ा आश्रम में एक असमय बम विस्फोट में हुआ था। तथापि, आधिकारिक एवं स्थापित भारतीय इतिहास के दस्तावेजों के अनुसार, अशफाकुल्ला खाँ को काकोरी कांड में उनकी भूमिका के लिए १९ दिसंबर १९२७ को फैजाबाद जेल में फाँसी दी गई थी। स्वामी भीष्म डिजिटल हेरिटेज म्यूजियम इतिहास के छात्रों को निष्पक्ष अनुसंधान हेतु दोनों वृत्तांत प्रस्तुत करता है।
सन् १९२० और ३० के दशकों में स्वामी भीष्म जी महाराज का करेहुड़ा (Karehuda) आश्रम क्रान्तिकारियों का प्रमुख गुप्त शरणस्थल बना। यहाँ चन्द्रशेखर आज़ाद (Azad), भगत सिंह (Bhagat Singh), सुखदेव, राजगुरु, यशपाल और प्रकाशवती जैसे क्रांतिकारियों ने आश्रय लिया। इसी आश्रम में रहते हुए क्रान्तिकारियों ने बम बनाने का परीक्षण किया। एक बार दिवाली के समीप बम निर्माण के समय असमय विस्फोट हो गया, जिसमें अशफाकुल्ला खाँ शहीद हो गए (Granth Claim)। स्वामी जी ने भेद खुलने से बचाने के लिए उनके शव के अवशेषों को यमुना जी की सहायक तुडुन नदी में विसर्जित कराया। इसी कालखंड में स्वामी जी ने दिल्ली यमुना तट पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से भेंट की और उन्हें अपनी देशभक्ति की रचना सुनाई जिसने युवाओं में राष्ट्रभक्ति का संचार किया।