अध्याय 5

अध्याय 5: अछूतोद्धार, सुधार यात्राएं एवं नारी रक्षा

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स्वामी भीष्म जी का मानना था कि जो समाज महिलाओं और वंचितों की रक्षा नहीं कर सकता, वह स्वतंत्र होने के योग्य नहीं है। सन् १९०९ में सहारनपुर रेलवे स्टेशन के निकट उन्होंने अपहरण की जा रही सिक्ख महिलाओं को तस्करों से छुड़ाया। उसी वर्ष, पुरानी दिल्ली के संकरे दरीबा कलां (Dariba Kalan) क्षेत्र में उन्होंने अपराधियों के चंगुल से ६-७ बंधक स्त्रियों को मुक्त कराया। इसके बाद, स्वामी श्रद्धानन्द जी के सहयोग से उन्होंने उन स्त्रियों का महिला आश्रमों में सम्मानजनक पुनर्वास कराया। छरौली (Chhaprauli) में उन्होंने पं. रामदत्त भारद्वाज के सहयोग से पीड़ित परिवारों की सहायता की और समाज सुधार की मिसाल पेश की।