अध्याय 4

अध्याय 4: शास्त्र दीक्षा, आर्य समाज और लोक-भजन

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२२ वर्षों के मौन साधना के उपरांत स्वामी भीष्म जी ने शास्त्र अध्ययन प्रारंभ किया। अजमेर एवं हरिद्वार प्रवास के दौरान वे महर्षि दयानन्द सरस्वती के ‘सत्यार्थ प्रकाश’ से अत्यधिक प्रभावित हुए। सन् १९०३ में ग्राम बाली (Bali) में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से उन्होंने विधिवत रूप से वैदिक सिद्धांतों को अपनाया। समाज के अंधविश्वास, बाल-विवाह और पाखंड को समाप्त करने के लिए उन्होंने ‘संगीत एवं भजन’ को माध्यम बनाया। सन् १९०७ में ग्राम करोड़ा में उन्होंने अपनी प्रथम ऐतिहासिक ‘भजन मंडली’ का गठन किया, जिसमें उनके साथ ज्ञानेन्द्र (Gyanendra), खण्डा (Khanda) और मन्जीदोश्रभ (Manjidoshrabh) प्रमुख रूप से सम्बद्ध थे।