प्रारंभिक जीवन और आध्यात्मिक चेतना

स्वामी भीष्म जी महाराज का प्रारंभिक जीवन तपस्या और ज्ञान की सतत खोज का साक्षात प्रमाण है। बाल्यावस्था से ही उनकी चेतना ईश्वरीय साधना तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन की ओर उन्मुख थी। हरिद्वार के शांत वातावरण में उन्होंने वर्षों मौन रहकर वेदों का गहन अध्ययन किया। मेरठ में स्वामी दयानन्द सरस्वती के … Read more

गंगा तट मौन साधना

स्वामी भीष्म जी महाराज ने हरिद्वार के निकट पहाड़ी गुफाओं में ३ वर्ष का अखंड मौन व्रत धारण किया।

संन्यास दीक्षा

मेरठ में स्वामी दयानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में स्वामी भीष्म जी ने औपचारिक संन्यास धारण किया।

सत्यार्थ प्रकाश

स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित क्रांतिकारी वैदिक ग्रन्थ जो सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करता है।

हरिद्वार

गंगा के पावन तट पर स्थित वह स्थान जहाँ स्वामी भीष्म जी महाराज ने गहन साधना की थी।